अल्सरेटिव कोलाइटिस केवल पाचन का नहीं बल्कि तनाव और जीवनशैली का रोग है

अल्सरेटिव कोलाइटिस (Ulcerative Colitis) बड़ी आँत (Large Intestine) और गुदा (Rectum) में होने वाली सूजन और घाव (Ulcer) की अवस्था है। यह एक प्रकार की आंतों की सूजन (Inflammatory Bowel Disease) है, जिसमें मल में खून, दर्द और कमजोरी जैसे लक्षण दिखते हैं।आयुर्वेद में इसे “पित्तज ग्रहणी” या “रक्तातिसार” के रूप में जाना गया है — यानी शरीर में पित्त और रक्त दोष के बढ़ने से आँतों में सूजन, जलन और रक्तस्राव होता है।

मुख्य कारण (Causes)

  • अत्यधिक मसालेदार, तली हुई और गरम प्रकृति की चीज़ों का सेवन
  • अधिक तनाव, चिंता या क्रोध
  • एंटीबायोटिक्स या पेनकिलर का लंबे समय तक प्रयोग
  • रोग प्रतिरोधक शक्ति की कमी

मुख्य लक्षण (Symptoms)

  • बार-बार दस्त या मल के साथ खून आना
  • पेट में ऐंठन और भारीपन
  • भूख कम लगना
  • कमजोरी, थकान और वजन घटना
  • पेट में जलन और गैस

 आयुर्वेद के अनुसार कारण

  • आयुर्वेद में यह रोग पित्त और रक्त दोषों के बढ़ने से उत्पन्न होता है।
  • “अतिशय पित्तं रक्तं च, ग्रहणीं विकारयेत्।”
    (अर्थात् — जब पित्त और रक्त बढ़ते हैं, तो आँतों में सूजन और विकार उत्पन्न होते हैं।)

शीघ्र राहत देने वाले श्रेष्ठ आयुर्वेदिक उपाय (Quick Relief Remedies)
बेल पल्प (Bael Fruit)

  • कैसे लें: 2 चम्मच बेल का गूदा 1 गिलास ठंडे पानी में मिलाकर दिन में 2 बार पिएँ।
    लाभ: आंतों की सूजन शांत करता है, दस्त और जलन कम करता है।

इसबगोल + छाछ (Isabgol + Buttermilk)

  • कैसे लें: 1 टीस्पून इसबगोल में 1 गिलास ताज़ी छाछ मिलाकर सुबह-शाम पिएँ।
    लाभ: आँतों की परत को ठंडक देता है और मल को स्थिर बनाता है।

एलोवेरा रस (Aloe Vera Juice)

  • कैसे लें: 20 ml एलोवेरा रस + 20 ml गिलोय रस मिलाकर सुबह खाली पेट पिएँ।
    लाभ: सूजन कम करता है, घाव भरता है और आंतों को शांत रखता है।

गिलोय और शतावरी चूर्ण

  • कैसे लें: दोनों का 1-1 चम्मच गुनगुने दूध या पानी के साथ सुबह-शाम लें।
    लाभ: पित्त दोष को संतुलित करता है और आंतों की परत को पोषण देता है।

नारियल पानी + मुलेठी पाउडर

  • कैसे लें: 1 गिलास नारियल पानी में ½ चम्मच मुलेठी पाउडर मिलाकर दिन में 2 बार लें।
    लाभ: शरीर को ठंडक देता है और अल्सर में तेज राहत देता है।

 धायफल या नागकेसर चूर्ण

  • कैसे लें: 1 चम्मच चूर्ण शहद के साथ सुबह-शाम लें।
    लाभ: रक्तस्राव रोकने में सहायक और आँतों के घाव भरने में उपयोगी।

 हल्का और सत्विक आहार अपनाएँ

  • खिचड़ी, दही-चावल, मूँग दाल का सूप
  • मसाले, कॉफ़ी, चाय, फास्ट फूड, और मिर्च से परहेज़
  • पर्याप्त जल और नारियल पानी का सेवन करें
  • 🕉 आयुर्वेदिक औषधियाँ (Under Expert Guidance)
  • Kutajghan Vati – दस्त और खून नियंत्रित करती है
  • Pitta Balance Capsules – पित्त दोष संतुलित करती है
  • Vasaka + Mulethi Churna – सूजन और जलन कम करती हैं

 निष्कर्ष — अल्सरेटिव कोलाइटिस केवल पाचन का नहीं बल्कि तनाव और जीवनशैली का रोग है।
आयुर्वेद कहता है —“पित्तं नियंत्र्य जीवनं सुखं।”(जब पित्त संतुलित होता है, तब जीवन सुखद होता है।) संतुलित आहार, शीतल औषधियाँ और मन की शांति — यही है इस रोग का असली इलाज।

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